नई दिल्ली: आखिरकार भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच 18 साल का लंबा इंतज़ार खत्म हो गया है।
दोनों पक्षों ने फ्री ट्रेड एग्रीमेंट यानी FTA पर सहमति बना ली है।
इस समझौते को मदर ऑफ ऑल डील्स कहा जा रहा है।
यह अहम डील मंगलवार को दिल्ली के हैदराबाद हाउस में हुई।
इसी दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यूरोपीय नेताओं की मेज़बानी की।
प्रधानमंत्री मोदी ने यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन से मुलाकात की।
वहीं, यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा भी बैठक में शामिल रहे।
“आज भारत और यूरोप इतिहास रच रहे हैं”
सबसे पहले, उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने इस समझौते को ऐतिहासिक बताया।
उन्होंने कहा कि यह अब तक का सबसे बड़ा व्यापार समझौता है।
इसके अलावा, उन्होंने बताया कि इस डील से दो अरब लोगों का मुक्त व्यापार क्षेत्र बनेगा।
इससे भारत और यूरोप, दोनों को आर्थिक लाभ मिलेगा।
उन्होंने यह भी कहा कि यह केवल शुरुआत है।
आगे चलकर रणनीतिक साझेदारी और मजबूत होगी।
स्किल्स और टेक्नोलॉजी का मेल
इसके बाद, वॉन डेर लेयेन ने समझौते के फायदे गिनाए।
उन्होंने कहा कि यह भारतीय स्किल्स और सर्विसेज़ को यूरोपीय टेक्नोलॉजी से जोड़ता है।
साथ ही, यह यूरोपियन कैपिटल और इनोवेशन को भारत से जोड़ता है।
इससे ऐसी ग्रोथ होगी जो अकेले संभव नहीं थी।
यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष ने क्या कहा?
वहीं, एंटोनियो कोस्टा ने शांति पर ज़ोर दिया।
उन्होंने कहा कि भारत और EU न्यायपूर्ण और स्थायी शांति के समर्थक हैं।
इसके साथ ही, उन्होंने यूक्रेन की संप्रभुता का समर्थन दोहराया।
उन्होंने अंतरराष्ट्रीय कानून को बनाए रखने की बात भी कही।
FTA क्यों है इतना अहम?
अब सवाल उठता है कि यह समझौता इतना अहम क्यों है।
इस FTA से भारत और EU के रिश्तों में बड़ा विस्तार होगा।
इसके अलावा, कई सेक्टर्स में नए सहयोग के अवसर खुलेंगे।
हालांकि, औपचारिक हस्ताक्षर में अभी कुछ महीने लग सकते हैं।
18 साल बाद टूटा गतिरोध
गौरतलब है कि भारत-EU बातचीत 2007 में शुरू हुई थी।
लेकिन मतभेदों के कारण 2013 में यह प्रक्रिया रुक गई।
इसके बाद, जून 2022 में बातचीत दोबारा शुरू हुई।
आखिरकार अब इस पर सहमति बन गई है।
भारत-EU व्यापार की स्थिति
फिलहाल, यूरोपीय यूनियन भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है।
वित्त वर्ष 2024-25 में दोनों के बीच व्यापार करीब 136 अरब डॉलर रहा।
इसमें भारत का निर्यात 76 अरब डॉलर रहा।
वहीं, आयात लगभग 60 अरब डॉलर रहा।
पीएम मोदी ने क्या कहा?
इसी दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने समझौते को ऐतिहासिक बताया।
उन्होंने कहा कि यह वैश्विक GDP के 25 प्रतिशत हिस्से को कवर करता है।
उन्होंने यह भी कहा कि वैश्विक व्यापार का एक-तिहाई हिस्सा इससे जुड़ा है।
यह समझौता 140 करोड़ भारतीयों के लिए नए अवसर लाएगा।
पीएम मोदी ने बताया कि भारत-EU व्यापार 180 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है।
साथ ही, यूरोप में करीब 8 लाख भारतीय रहते हैं।
एग्रीमेंट के बड़े ऐलान
अब बात करते हैं इस डील के बड़े फैसलों की:
- बीयर पर टैक्स घटकर 50% होगा
- स्पिरिट्स पर टैक्स 40% किया जाएगा
- वाइन पर टैक्स 20–30% तक घटेगा
- मोटर गाड़ियों पर टैक्स 110% से घटकर 10% होगा
- ऑलिव ऑयल और वेजिटेबल ऑयल टैक्स-फ्री होंगे
- फ्रूट जूस और प्रोसेस्ड फूड पर टैक्स हटेगा
इसके अलावा, EU भारत को €500 मिलियन की मदद देगा।
यह सहायता ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन कम करने में काम आएगी।
आगे क्या?
अंत में, यह कहा जा सकता है कि यह डील व्यापार और निवेश बढ़ाएगी।
इसके साथ ही, रोज़गार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
कुल मिलाकर, भारत-EU संबंधों में इसे एक ऐतिहासिक मोड़ माना जा रहा है।
